
बिलासपुर। बिना दस्तावेजों के चल रही दो बसों को आरटीओ द्वारा कब्जे के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। बसों को कब्जे में लेने के बाद एक नेता द्वारा बसें छोड़ने का आरटीओ दबाव बनाने की यहां चर्चा है। मामला दो रोज पहले का है। आरटीओ ने बसों को कब्जे में लेने की पुष्टि की है। अब इस मामले में बस ऑपरेटरों ने आरटीओ पर बेवजह तंग करने के आरोप लगाए हैं। ऑपरेटरों ने बाकायदा उपायुक्त बिलासपुर को इस मामले में शिकायत पत्र भी सौंपा है। यह मामला एसएमएस के जरिए पुलिस तक भी पहुंच गया है। बिलासपुर पुलिस इस संदर्भ में किसी तरह की जानकारी नहीं दे रही।
दो रोज पहले आरटीओ कृष्णा नेगी ने घुमारवीं क्षेत्र के रूटों पर बिना परमिट चल रही बसों को कब्जे में लिया था। लेकिन, कथित तौर पर एक नेता पर आरटीओ ने बस कब्जे में नहीं लेने के लिए दबाव बनाने आरोप लगाए। यहां तक कि यह महिला आरटीओ रात तक एचआरटीसी के वर्कशॉप में देर तक डटी रही। बसों को अपने कब्जे में लेने के बाद ही वह यहां से मंडी गई। इसका पुलिस को बाकायदा एसएमएस भी हुआ है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि एसएमएस किस नंबर से आया और किसने किया इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस विभाग ने सूचना के लिए यह एसएमएस परिवहन विभाग को भी वेरिफिकेशन के लिए भेजा है। उधर, परिवहन विभाग ने आरटीओ को मुख्य कार्यालय बुलाया किया है। विभाग के निदेशक रितेश चौहान ने कहा कि इस मामले की लिखित शिकायत उनके पास नहीं आई है। लेकिन मैसेज उनके विभाग को पुलिस द्वारा सूचनार्थ भेजा गया है। उधर, घुमारवीं क्षेत्र के बस ऑपरेटरों ने आरटीओ के खिलाफ उपायुक्त बिलासपुर को शिकायत पत्र सौंपा है। इसमें कहा गया है कि आरटीओ के पास चार जिलों का प्रभार है, लेकिन वह इसी क्षेत्र के बस ऑपरेटरों को तंग कर रहे हैं। उपायुक्त डा. अजय शर्मा ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है।
